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डिलीवरी चालान और ई-वे बिल

चालान पर जा रहे माल पर ई-वे बिल के वही नियम लागू होते हैं जो इनवॉइस पर जा रहे माल पर। ई-वे बिल में आप चालान को ही डॉक्यूमेंट बताते हैं, इसलिए दोनों हूबहू मेल खाने चाहिए।

ई-वे बिल कब चाहिए

इसीलिए टैक्स न लगे तब भी चालान पर वैल्यू होनी चाहिए: ई-वे बिल इसे माँगता है।

चालान से ई-वे बिल तक

ई-वे बिल सरकारी पोर्टल (ewaybillgst.gov.in) या उसके ऐप पर बनता है। अपने चालान से ये डिटेल भरें:

ई-वे बिल का खानाचालान से
Transaction typeOutward (आप भेज रहे हैं)
Sub typeJob work, For own use, Exhibition or fairs, SKD/CKD/lots, Others… मकसद के हिसाब से
Document typeDelivery Challan
Document number और तारीखDC/26-27/021, 4 Nov 2026
From और Toकंसाइनर और कंसाइनी: GSTIN, पता, PIN कोड
Itemsविवरण, HSN, मात्रा, टैक्सेबल वैल्यू, टैक्स रेट
Part Bगाड़ी नंबर, या ट्रांसपोर्टर ID और LR / डॉकेट नंबर

ई-वे बिल नंबर चालान के नोट में लिखें और फिर से प्रिंट करें, ताकि ड्राइवर के पास वाली कॉपी पर दोनों हों।

कितने दिन वैलिड रहता है

आम माल के लिए ई-वे बिल 200 km तक 1 दिन वैलिड रहता है, और हर अगले 200 km या उसके हिस्से के लिए 1 दिन और। बहुत बड़े आकार (over-dimensional) के माल को रोज़ कम दूरी मिलती है। दिन आधी रात को खत्म होता है, इसलिए शाम को बना ई-वे बिल अपना पहला दिन लगभग पूरा खो देता है। अगर गाड़ी खराब हो जाए, तो आगे बढ़ने से पहले Part B में नई गाड़ी का नंबर भरें।

एक हल किया हुआ उदाहरण

लुधियाना की एक यूनिट ₹1,40,000 का यार्न करीब 280 km दूर पानीपत, हरियाणा के एक डायर को DC/26-27/021 पर भेजती है। यह दूसरे राज्य में जॉब वर्क है, इसलिए ई-वे बिल चाहिए (यहाँ ₹20,000 के लिए भी चाहिए होता)। Sub type Job work, document type Delivery Challan, Part B में गाड़ी PB10 CD 5678। 280 km यानी 2 दिन की वैलिडिटी। डायर यार्न अपने चालान और नए ई-वे बिल के साथ लौटाता है।

आम गलतियाँ

मेकर में प्रिंट से पहले गाड़ी नंबर, ट्रांसपोर्टर और LR नंबर भरें, और अगर माल सप्लाई के लिए जा रहा है तो GST पर टिक लगाएँ, ताकि चालान पर वही वैल्यू और टैक्स दिखे जो ई-वे बिल पर है। टैक्स इनवॉइस पर बिके माल के लिए इनवॉइस मेकर इस्तेमाल करें।
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