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डिलीवरी चालान फ़ॉर्मेट: कब बनाएँ और इस पर क्या लिखें

डिलीवरी चालान उस माल के साथ जाता है जो टैक्स इनवॉइस के बिना जा रहा है। यह माल लेने वाले, ट्रांसपोर्टर और रास्ते में किसी भी अफ़सर को बताता है कि क्या ले जाया जा रहा है और क्यों। GST में इसकी डिटेल की एक तय लिस्ट है और यह तीन कॉपी में बनता है।

इनवॉइस की जगह चालान कब बनता है

आम बिक्री में रजिस्टर्ड बिज़नेस माल निकलने से पहले या उसी समय टैक्स इनवॉइस बनाता है। GST नियम (CGST Rules का Rule 55) इनवॉइस की जगह डिलीवरी चालान सिर्फ़ कुछ मामलों में मानते हैं:

दूसरे राज्य की ब्रांच (अलग GSTIN) को माल भेजना GST में सप्लाई माना जाता है, इसलिए उसके लिए टैक्स इनवॉइस चाहिए, चालान नहीं। उसी GSTIN के अंदर चालान काफ़ी है।

चालान पर क्या लिखना ज़रूरी है

  1. हेडिंग "Delivery Challan" और माल भेजने का मकसद।
  2. चालान नंबर और तारीख। 16 कैरेक्टर तक का सीरियल नंबर, फाइनेंशियल ईयर में एक ही बार, जैसे DC/26-27/014।
  3. कंसाइनर: आपका नाम, पता और GSTIN।
  4. कंसाइनी: नाम और पता, और GSTIN अगर वह रजिस्टर्ड है।
  5. माल: विवरण, HSN कोड और मात्रा। सही मात्रा अभी पता न हो तो अंदाज़ा लिखें।
  6. टैक्सेबल वैल्यू। जहाँ माल कंसाइनी को सप्लाई के लिए जा रहा हो, वहाँ नियम टैक्स रेट और टैक्स की रकम भी माँगते हैं।
  7. प्लेस ऑफ़ सप्लाई, जब माल राज्य की सीमा पार करे।
  8. सिग्नेचर आपके या जिसे आपने अधिकार दिया हो उसके।

गाड़ी नंबर, ट्रांसपोर्टर और LR नंबर इस लिस्ट में नहीं हैं, पर ये ई-वे बिल में काम आते हैं और बाद में बहस खत्म करते हैं।

तीन कॉपी

कॉपीक्या लिखा होता हैकिसके पास रहती है
ओरिजिनलOriginal for consigneeमाल के साथ लेने वाले के पास जाती है
डुप्लीकेटDuplicate for transporterड्राइवर या ट्रांसपोर्ट कंपनी
ट्रिप्लीकेटTriplicate for consignorआपकी फ़ाइल में, लेने वाले के सिग्नेचर के साथ

एक सैंपल

लुधियाना की एक गारमेंट यूनिट उसी शहर की सिलाई यूनिट को कटे हुए पीस भेजती है: DC/26-27/014, 4 Nov 2026, मकसद जॉब वर्क।

मालHSNमात्रारेटवैल्यू
कॉटन शर्ट के कटे पीस62051,200 Pcs₹95₹1,14,000

गाड़ी PB10 AB 1234, अपना टेम्पो। वैल्यू ₹50,000 से ज़्यादा है, इसलिए ई-वे बिल भी बनता है (देखें चालान और ई-वे बिल)।

आम गलतियाँ

कुछ धंधों और राज्यों के नियमों में छूट होती है। अगर पक्का नहीं कि किसी माल के लिए इनवॉइस चाहिए या चालान, तो अपने अकाउंटेंट से पूछें।
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